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Saturday, December 19, 2015

में तो चित्रगुप्त हूँ

#rkbanshi

ऑपरेशन के बाद मरीज: डॉक्टर साब क्या में अब रोग मुक्त हूँ?
एक आवाज़ आई बेटा डॉक्टर तो नीचेे रह गया में तो चित्रगुप्त हूँ ।


#rkbanshi

Friday, December 18, 2015

बाँट कर खानेवाला कभी भूखा नहींमरता...

#rkbanshi

मेरी हैसीयत से ज्यादा मेरी
थाली मे तूने परोसा है.
तू लाख मुश्किलें भी दे दे मालिक, मुझे तुझपे भरोसा है.
एक बात तो पक्की है की...
छीन कर खानेवालों का कभी पेट नहीं
भरता
और बाँट कर खानेवाला कभी भूखा नहीं
मरता...!!!


#rkbanshi

Life of a GIRL

#rkbanshi

Life of a GIRL"
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Ek ldki jo kbhi jeans n shorts pehna karti thi aj wo dress n sari pehn ne lagi
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Ek ldki jo dosto k sath hasti khelti thi wo aj rishte sambhalne lgi
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Ek ldki jo khudke liye b subah jaldi nahi uth ti thi wo aj dusro k liye jaldi uthne lagi
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Ek ldki jo apne liye maa baap se ladai karti thi aj wo kisi or k liye duniya se ladne lagi
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Ek ldki jo apne aap m busy rehti thi wo aj gar k kam m busy ho gyi
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Ek ldki jo kitchen m b nhi jati thi aj wo dusro k liye khana bnane lagi
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Ek ldki jo kbhi khud ki jeb Bharti thi aj wo kisi ka ghar bharne lagi
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Ek ldki jo kbhi dusro ki himmat bna karti thi aj wo khud k liye himmat mangne lagi
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Ek ldki jo hmesa hasti thi dusro ko hasati thi aj wo itna busy ho gyi k wo hasna hi bhul gyi
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Kyun???
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Kyunki
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Kyunki wo shaadi kar k kisi or k ghar chali gyi...
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Kyunki wo parai ho gyi
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Ldkiya hoti hi isliye h k wo aj is ghar m ujala Kare or kal kisi or k ghar m jisko wo janti b nhi lekin fir b puri unki ho jati h
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Just cz she is a GIRL
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Ye mt socho k hmare ghar ki ronak chali gyi
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Ye Socho k wo kisi or k gar m ronak karne chali gyi
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Betiyaan ghar ki shaan hoti h ghar ki khusiya hoti h
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Wo pehle kisi ki beti bnti h fir kisi ki behen fir kisi ki dost fir kisi ki bahu or kisi ki maa
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Life is not possible without a GIRL
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GIRLS are special
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Respect them 
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#rkbanshi

'समझदार' कहते हैं।

#rkbanshi

नज़रें मिले तो उसे 'इज़हार' कहते हैं;
रातों को नींद ना आये तो उसे 'प्यार' कहते हैं;

मिले दिल तो उसे 'इकरार' कहते हैं;
पर जो इन सब में ना पड़े उसे 'समझदार' कहते हैं।


#rkbanshi

Tuesday, December 15, 2015

पाप है वो तेरे

#rkbanshi

Girlfriend-..मेरे पापा भी मुझे दिन भर डांटते रहते हें
Boy friend -..कोई बात नहीं यार..
पापा हे वो तेरे...
Girlfriend -..पर दिन भर क्यों डांटते रहते हे..
चुप ही नहीं होते..
Boy Friend-..डार्लिंग, पापा हे वो तेरे
Girlfriend-..पर बिना वजह क्यों डाँटते हे?
Boy Friend---अरे यार..जाने भी दे..
पापा हे वो तेरे
Girlfriend-..तुम भी उनका ही favour लोगे..
मेरी तो कोई वैल्यू ही नहीं तुम्हारे लिए..
Boy Friend--..तो क्या टाँगे तोड़ दूँ हरामज़ादे की.....कुत्ते को पटक पटक के सारी अकड़ झाड़ दुंगा ... मिलने दे उसकी तो ....साला कबूतर बहुत उछल रहा है.......
Girlfriend..गाली मत दो जानू...
पापा हे वो मेरे..
Boy Friend--..मैं भी तो एक घंटे से वो ही कह रहा था कमीनी कि ..
पापा हे वो तेरे..


#rkbanshi

Saturday, December 12, 2015

Whatsapp joke

#rkbanshi

Bacha: मम्मी आप तो कहते थे कि परी उड़ती है
..........फिर अपनी पड़ोसन आंटी क्यों नहीं उड़ती????!!!

मम्मी : उस बंदरिया को परी किसने कहा??

बच्चा :डैडी ने . . .

मम्मी: तो फिर ....बेटा आज उड़ेगी ....वो भी और तेरा डैडी
भी....


#rkbanshi

डाली ने डाली पर नज़र डाली

#rkbanshi

डाली ने डाली पर नज़र डाली;

किसी ने इस पर डाली,

किसी ने उस पर डाली;

हमने जिस पर नज़र डाली;

उसके बाप ने उसकी शादी कहीं और कर डाली।


#rkbanshi

Wednesday, December 9, 2015

Success

#rkbanshi

Success is a Tasty Dish.
Patience, Intelligence, Knowledge and Experience are its 'Ingredients'.
But "Hard Work" is that little Salt that makes it Delicious....!!


#rkbanshi

Tuesday, December 8, 2015

Whatsapp fun

#rkbanshi

अच्छा है जुकरबर्ग यहाँ पैदा नही हुआ वरना उसके पिताजी कहते शर्मा जी के लौंडे को देख डॉक्टर बन गया है और तू दिनभर फेसबुक में घुसा रहता है


#rkbanshi

Monday, December 7, 2015

बाज लगभग 70 वर्ष जीता है ....





बाज लगभग 70 वर्ष जीता है ....
परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है ।
उस अवस्था में उसके शरीर के
3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं .....


पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है, तथा शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं ।
चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है,
और भोजन में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है ।
पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूर्णरूप से खुल नहीं पाते हैं, उड़ान को सीमित कर देते हैं ।
भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना,
और भोजन खाना .. तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं ।
उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं....


1. देह त्याग दे,


2. अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे, या फिर


3.स्वयं को पुनर्स्थापित करे


आकाश के निर्द्वन्द एकाधिपति के रूप में……..
जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
अंत में बचता है तीसरा लम्बा और अत्यन्त पीड़ादायी रास्ता ।
बाज चुनता है तीसरा रास्ता ..

और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है ।





वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है ..
और तब स्वयं को पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करता है !!


सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है,


चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं है पक्षीराज के लिये !
और वह प्रतीक्षा करता है
चोंच के पुनः उग आने का ।


उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है,
और प्रतीक्षा करता है ..
पंजों के पुनः उग आने का ।


नयी चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक-एक कर नोंच कर निकालता है !
और प्रतीक्षा करता है ..
पंखों के पुनः उग आने का ।


150 दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा के बाद ...
मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान पहले जैसी....
इस पुनर्स्थापना के बाद
वह 30 साल और जीता है ....


ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।
इसी प्रकार इच्छा, सक्रियता और कल्पना, तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं हम इंसानों में भी !
हमें भी भूतकाल में जकड़े
अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी ।
150 दिन न सही.....
60 दिन ही बिताया जाये

स्वयं को पुनर्स्थापित करने में !
जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और
नोंचने में पीड़ा तो होगी ही !!
और फिर जब बाज की तरह उड़ानें भरने को तैयार होंगे ..
इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी,
अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी ।
हर दिन कुछ चिंतन किया जाए
और आप ही वो व्यक्ति हे
जो खुद को दुसरो से बेहतर जानते है ।.
सिर्फ इतना निवेदन की निष्पक्षता के साथ छोटी-छोटी शुरुअiत करें परिवर्तन करने की . . . . . . .